दोस्तों, अगर आप अपना खुद का कोई नया काम या बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, या फिर आप अपने गांव, कस्बे और शहर में बनने वाले किसी खास सामान को पूरी दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आपके मन में ये सवाल जरूर आता होगा कि आखिर odop yojana kya hai?
आजकल हर जगह इसी योजना की चर्चा है। आज हम बिलकुल आसान और सरल भाषा में समझेंगे कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (one district one product) यानी एक जिला एक उत्पाद योजना क्या है। इसके साथ ही हम विस्तार से जानेंगे कि odop scheme details in hindi क्या हैं, छोटे व्यापारियों और गांव के कारीगरों को odop ke fayde कैसे मिलते हैं, odop up में कैसे और क्यों शुरू हुई, और आप घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से odop online apply कैसे कर सकते हैं।
तो चलिए, बिना किसी देरी के इस योजना को ऐसे समझते हैं जैसे कोई दोस्त आपको कहानी सुना रहा हो, ताकि आपके घर का एक 5वीं क्लास का बच्चा भी इसे आसानी से समझ जाए।
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आसान भाषा में समझें: ODOP Yojana Kya Hai?
सबसे पहले इसके नाम का मतलब समझते हैं। ODOP का फुल फॉर्म होता है – One District One Product (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट)। हिंदी में इसे ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ कहा जाता है ।
हमारे प्यारे भारत देश के हर जिले की अपनी एक अलग और खास पहचान है। जैसे अगर आप बनारस जाते हैं तो वहां की साड़ी मशहूर है, अलीगढ़ जाते हैं तो वहां के ताले पूरी दुनिया में जाने जाते हैं, या फिर मुरादाबाद के पीतल के बर्तन । भारत सरकार और राज्य सरकारों ने मिलकर यह सोचा कि क्यों न हर जिले के किसी एक ऐसे ही खास प्रोडक्ट (सामान) को चुना जाए और उसे पूरे देश और विदेशों में मशहूर किया जाए। सरकार की इसी सोच और पहल का नाम ODOP योजना है।
इस योजना का बहुत ही सीधा सा मतलब है: आपके जिले का जो भी सामान सबसे ज्यादा मशहूर है या वहां सबसे ज्यादा बनाया जाता है, सरकार उसे बनाने वाले लोगों (किसानों, कारीगरों, और छोटे व्यापारियों) को पैसा, सही ट्रेनिंग और उसे बेचने के लिए एक बड़ा बाजार (मार्केट) देगी ।
योजना की शुरुआत और इतिहास (ODOP UP)
अगर आप सोच रहे हैं कि यह योजना कहाँ से आई, तो आपको बता दें कि odop up में ही सबसे पहले शुरू हुई थी। यह योजना साल 2018 में उत्तर प्रदेश (UP) की सरकार द्वारा शुरू की गई थी । यह मॉडल असल में जापान देश के “वन विलेज वन प्रोडक्ट” (एक गांव एक उत्पाद) मॉडल से प्रेरित है । जब यूपी में यह योजना बहुत सफल हुई, तो केंद्र सरकार ने इसे पूरे देश में लागू कर दिया। साल 2025-2026 तक इस योजना के तहत 761 जिलों के 1,102 उत्पादों (प्रोडक्ट्स) को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है ।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? (Objectives of ODOP)

भारत सरकार ने इस योजना को क्यों बनाया? आखिर odop yojana kya hai और इसका लक्ष्य क्या है? इसके कुछ बहुत ही सीधे और साफ कारण हैं:
- लोकल को ग्लोबल बनाना: आपके जिले की खासियत को सिर्फ भारत के दूसरे राज्यों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाना । इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ भी कहा जाता है ।
- गांव में ही रोजगार बढ़ाना: जब आपके जिले का सामान ज्यादा बिकेगा, तो जाहिर सी बात है उसे बनाने के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत होगी। इससे आपके ही शहर और गांव में नौकरियां मिलेंगी और लोगों को काम की तलाश में बड़े शहरों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा (पलायन रुकेगा) ।
- कारीगरों और छोटे व्यापारियों की मदद: जो लोग पीढ़ियों से कोई कला जानते हैं (जैसे मिट्टी के बर्तन बनाना, कढ़ाई करना, या बांस का सामान बनाना), उन्हें काम बढ़ाने के लिए पैसे और नई मशीनों की मदद देना ।
- निर्यात (Export) बढ़ाना: भारत में बने सामान को विदेशों में ज्यादा से ज्यादा बेचा जा सके, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो ।
ODOP Scheme Details in Hindi: योजना में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं?
बहुत से लोगों को लगता है कि यह योजना सिर्फ फैक्ट्रियों के लिए है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर आप जानना चाहते हैं कि odop yojana kya hai और क्या आपका काम इसमें आएगा, तो नीचे दी गई लिस्ट को ध्यान से पढ़ें। इस योजना में लगभग हर तरह के काम को शामिल किया गया है:
- खेती और किसानी (Agriculture): आपको जानकर हैरानी होगी कि ओडीओपी पहल के अंतर्गत लगभग 45% उत्पाद खेती और कृषि से जुड़े हैं । इसमें आम, आलू, टमाटर, लीची जैसी फसलें शामिल हैं । इसके अलावा आदिवासी इलाकों के जंगली उत्पाद और शहद भी इसमें आते हैं ।
- खाने-पीने का सामान (Food Processing): अगर आप दूध (डेयरी) का काम करते हैं, फल-सब्जी की पैकिंग करते हैं, अचार, पापड़, मांस, मछली पालन या अनाज से बनी चीजें बनाते हैं, तो आप भी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं ।
- हाथ की कारीगरी (Handicrafts): हाथ से बने सजावटी सामान, आभूषण, मिट्टी के बर्तन, और चमड़े का सामान बनाने वाले कुशल कारीगरों के लिए यह योजना एक वरदान है ।
- कपड़े का काम (Textiles and Handloom): हाथ से बुने कपड़े (हथकरघा), चिकनकारी, और कालीन बनाने का काम भी इसके तहत बहुत तेजी से बढ़ रहा है ।
- खनिज और मशीनरी (Manufacturing): कुछ जिलों में जहाँ रत्न, आभूषण या खास तरह की मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) होती है, सरकार उन्हें भी पूरा सपोर्ट दे रही है ।
छोटे व्यापारियों और कारीगरों को ODOP Ke Fayde (सब्सिडी और लाभ)
अगर आप अच्छी तरह समझ गए हैं कि odop yojana kya hai, तो अब आपका अगला सवाल होगा कि इससे मुझे क्या फायदा मिलेगा? तो चलिए odop ke fayde को विस्तार से समझते हैं। सरकार इस योजना के तहत आपको 4 तरह की मुख्य सुविधाएं देती है:
1. पैसों की मदद (Margin Money Scheme / वित्तीय सहायता)
अगर आप अपना कोई नया छोटा उद्योग (बिजनेस) लगाते हैं, जो आपके जिले के ODOP लिस्ट में आता है, तो सरकार आपको बहुत बड़ी छूट देती है। पीएमएफएमई (PMFME) योजना के तहत आपको प्रोजेक्ट की कुल लागत का 35% या अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी (छूट) मिलती है । आपको अपनी जेब से सिर्फ 10% पैसा लगाना होता है, बाकी का पैसा बैंक आपको लोन के रूप में दे देता है ।
2. महिलाओं और समूहों के लिए विशेष मदद (SHG Benefits)
जो महिलाएं या स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) गांव में रहकर खाने-पीने का सामान बनाते हैं, उन्हें अपना काम शुरू करने और छोटे-मोटे औजार (tools) खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 40,000 रुपये की शुरुआती मदद दी जाती है ।
3. फ्री ट्रेनिंग और औजार (Skill Development Scheme)
अगर आप काम जानते हैं लेकिन आपके पास सर्टिफिकेट नहीं है, तो सरकार आपको प्रमाणित (सर्टिफाई) करती है । और अगर आप कोई नया काम सीखना चाहते हैं, तो सरकार अकुशल कारीगरों को 10 दिन की बिलकुल फ्री ट्रेनिंग देती है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद काम करने के लिए एक पूरी की पूरी ‘एडवांस टूलकिट’ (मशीनें और औजार) भी मुफ्त में दी जाती है ।
4. मार्केटिंग और सामान बेचने में मदद (Marketing Assistance)
सामान तो बन गया, लेकिन उसे बेचेगा कौन? इसके लिए भी सरकार मदद करती है। अगर आप अपना सामान राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मेलों (exhibitions) में ले जाकर बेचना चाहते हैं, तो सरकार आपको वहां जाने और स्टॉल लगाने के लिए वित्तीय सहायता (पैसे) देती है । इसके अलावा, आपके सामान की अच्छी पैकिंग और ब्रांडिंग के लिए भी सरकार 50% तक का खर्च खुद उठाती है ।
एकता मॉल (PM Ekta Mall) और ODOP वॉल क्या है?
सरकार आपके सामान को सीधे बड़े ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कुछ बहुत ही खास जगहें बना रही है, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए:
- ODOP वॉल (ODOP Wall): यह बड़े-बड़े मॉल्स (जैसे SARAS आजीविका स्टोर) में एक खास जगह या दीवार होती है, जहाँ सिर्फ जिलों के खास देसी प्रोडक्ट सजाए जाते हैं । इससे होता यह है कि जो सामान गांव का कारीगर बनाता है, वो सीधे शहर के बड़े-बड़े ग्राहकों की नजर में आ जाता है और उसकी बिक्री बढ़ जाती है ।
- पीएम एकता मॉल (PM Ekta Mall): सरकार पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत पूरे देश में लगभग 29 ‘यूनिटी मॉल’ या ‘एकता मॉल’ बना रही है । इसके लिए सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है । इन मॉल्स की खासियत यह होगी कि इसमें हर राज्य की एक अलग दुकान होगी, जहाँ उस राज्य के सभी जिलों के ODOP प्रोडक्ट बेचे जाएंगे ।
उत्तर प्रदेश में ही सबसे पहले ODOP क्यों शुरू हुई? (ODOP UP)
कई लोग पूछते हैं कि odop up यानी उत्तर प्रदेश में ही सबसे पहले क्यों लॉन्च की गई? इसका जवाब बहुत ही दिलचस्प है:
यूपी एक बहुत बड़ा राज्य है और यहाँ कुछ ऐसे अद्भुत उत्पाद (सामान) बनते हैं जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलते ।
- जैसे सिद्धार्थनगर का बहुत पुराना और सेहतमंद ‘काला नमक’ चावल ।
- बहराइच में गेहूं के डंठल से बनने वाली दुर्लभ कलाकारी ।
- लखनऊ की मशहूर चिकनकारी और जरी-जरदोजी के कपड़े ।
- संभल में मरे हुए जानवरों की हड्डियों और सींग से इतना सुंदर हैंडीक्राफ्ट का सामान बनता है कि असली हाथीदांत की जरूरत ही नहीं पड़ती, जो कि पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा है ।
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इनमें से कई पुरानी कलाएं समय के साथ खत्म हो रही थीं । सरकार ने इस योजना के जरिए इन कलाओं को नया जीवन दिया और आज इनमें से कई उत्पादों को ‘जीआई टैग’ (GI Tag) भी मिल चुका है, जो इस बात का सुबूत है कि ये असली उत्पाद यूपी के ही हैं ।
कौन लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं? (Eligibility Criteria)

इस योजना का फायदा लेना बहुत आसान है। इसके लिए सरकार ने बहुत ही सामान्य शर्तें रखी हैं:
- उम्र सीमा: आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और वह भारत का नागरिक होना चाहिए ।
- पढ़ाई-लिखाई (Education): सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें पढ़ाई-लिखाई की कोई बंदिश नहीं है। यानी शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। कोई भी व्यक्ति यह काम कर सकता है ।
- सही प्रोडक्ट का चुनाव: आप उसी काम से जुड़े होने चाहिए, जो आपके जिले का मुख्य ODOP उत्पाद (Product) घोषित किया गया है ।
- बैंक रिकॉर्ड: आपने पहले से किसी भी बैंक या सरकारी संस्था का पैसा न मारा हो (यानी आप बैंक के डिफाल्टर न हों) ।
- अन्य योजनाएं: आपने पहले से सरकार की किसी और बड़ी स्वरोजगार योजना (जैसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम या मुख्यमंत्री रोजगार योजना) का फायदा न लिया हो ।
ODOP Online Apply कैसे करें? (आवेदन के लिए जरूरी कागजात)
अगर आप समझ चुके हैं कि odop yojana kya hai और आप इसके लिए योग्य हैं, तो अब बात करते हैं कि odop online apply कैसे करना है। आवेदन करने से पहले आपको नीचे दिए गए कागज (Documents) अपने पास तैयार रखने होंगे:
- डीपीआर (Detailed Project Report): आप क्या बिजनेस करना चाहते हैं, उसमें कौन सी मशीन लगेगी और कुल कितना खर्च आएगा, इसकी एक पूरी रिपोर्ट ।
- पहचान पत्र (ID Proof): आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड, या ड्राइविंग लाइसेंस ।
- पते का सबूत: आपका निवास प्रमाण पत्र ।
- जमीन/बिजनेस के कागज: आप जहाँ काम करेंगे, वो जगह आपकी है तो उसके कागज, अगर कंपनी है तो कंपनी का विवरण (मेमोरेंडम आदि) ।
- टैक्स की जानकारी: आपका हाल ही का भरा हुआ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) ।
आवेदन की प्रक्रिया: आप भारत सरकार के उद्योग विभाग (DPIIT) की आधिकारिक वेबसाइट या अपने राज्य की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म के साथ ऊपर बताए गए सभी कागज अपलोड करने होंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में अगर हम आसान शब्दों में कहें कि odop yojana kya hai, तो यह योजना भारत के छोटे गांवों और कस्बों में छिपे हुए हुनर को एक मंच देने का काम कर रही है। यह ‘मेक इन इंडिया’ का ही एक बड़ा रूप है । अगर आप भी अपना कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो अपने जिले के एक जिला एक उत्पाद (one district one product) के बारे में पता करें और आज ही इस योजना का लाभ उठाएं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (People Also Ask – FAQs)
ODOP क्या है आसान भाषा में बताएं?
ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) सरकार की एक योजना है जिसमें देश के हर जिले के किसी एक मशहूर काम या उत्पाद (जैसे मिट्टी के बर्तन बनाना, कपड़े की बुनाई या कोई खास फसल) को चुना जाता है । सरकार उस काम को बड़ा करने के लिए पैसे और ट्रेनिंग की मदद देती है ताकि वो सामान पूरी दुनिया में बिक सके ।
ODOP योजना सबसे पहले कब और कहाँ शुरू की गई थी?
यह योजना सबसे पहले साल 2018 में उत्तर प्रदेश (UP) राज्य में शुरू की गई थी । बाद में इसकी भारी सफलता को देखते हुए इसे पूरे भारत में लागू कर दिया गया।
एक जिला एक उत्पाद योजना से मुझे कितना लोन या सब्सिडी मिल सकती है?
इस योजना के तहत अगर आप अपने जिले के चयनित उत्पाद का बिजनेस लगाते हैं, तो सरकार आपको प्रोजेक्ट के कुल खर्च का 35% हिस्सा (जो अधिकतम 10 लाख रुपये तक हो सकता है) सब्सिडी (छूट) के रूप में देती है ।
क्या odop online apply करने के लिए कोई खास पढ़ाई जरूरी है?
जी नहीं, एक जिला एक उत्पाद योजना का लाभ लेने के लिए कोई खास पढ़ाई-लिखाई या डिग्री (शैक्षणिक योग्यता) की बिलकुल जरूरत नहीं है । बस आवेदन करने वाले की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए
मैं कैसे पता करूँ कि मेरे जिले का ODOP उत्पाद (Product) कौन सा है?
आप भारत सरकार की आधिकारिक ODOP डिजिटल जीआईएस मैप (Digital GIS Map) पोर्टल पर जा सकते हैं । वहां आप अपने राज्य और जिले का नाम डालकर तुरंत देख सकते हैं कि आपके जिले का कौन सा प्रोडक्ट इस योजना में चुना गया है।