अगर आपके मन में यह सवाल है कि madhyan bhojan yojana kya hai, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आसान भाषा में कहें तो, यह भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत, सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को दोपहर का खाना बिल्कुल मुफ्त में दिया जाता है।
इसे हम अंग्रेजी में Mid Day Meal Scheme भी कहते हैं। इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार की सोच बहुत ही सीधी और साफ़ थी – कोई भी बच्चा भूखे पेट पढ़ाई न करे। जब बच्चों को स्कूल में अच्छा और पौष्टिक खाना मिलता है, तो उनका ध्यान पढ़ाई में ज्यादा लगता है। इससे न सिर्फ बच्चों का स्वास्थ्य (Health) अच्छा होता है, बल्कि गरीब परिवारों के बच्चे भी स्कूल आने के लिए प्रेरित होते हैं। आज के समय में इसे ‘पीएम पोषण योजना’ (PM Poshan Yojana) के नाम से भी जाना जाता है।
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मध्यान भोजन योजना की शुरुआत कब और कैसे हुई? (History and Launch)
इस योजना का इतिहास बहुत पुराना और रोचक है। भारत में सबसे पहले इस तरह की योजना को आज़ादी से पहले ही कुछ जगहों पर शुरू किया गया था, लेकिन पूरे देश के स्तर पर इसकी कहानी कुछ इस तरह है:
- सबसे पहले शुरुआत: अगर हम बात करें कि राज्य के स्तर पर सबसे पहले इसे किसने अपनाया, तो वह राज्य था ‘तमिलनाडु’।
- राष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत: भारत सरकार ने पूरे देश के लिए 15 अगस्त 1995 को इस योजना की आधिकारिक शुरुआत की थी।
- शुरुआती रूप: जब यह योजना 1995 में शुरू हुई थी, तब इसका नाम ‘नेशनल प्रोग्राम ऑफ़ न्यूट्रिशनल सपोर्ट टू प्राइमरी एजुकेशन’ (NP-NSPE) था। शुरुआत में बच्चों को पका हुआ खाना नहीं मिलता था, बल्कि उन्हें हर महीने कच्चा अनाज (जैसे गेहूं या चावल) दिया जाता था।
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: साल 2001 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया कि वे बच्चों को कच्चा अनाज देने के बजाय स्कूलों में ‘पका हुआ गरम खाना’ (Cooked Meal) दें। इसके बाद से ही स्कूलों में रसोईघर बनने लगे और बच्चों को ताज़ा खाना मिलने लगा।
मध्यान भोजन योजना के मुख्य उद्देश्य (Main Objectives of the Scheme)
आखिर सरकार को यह योजना क्यों चलानी पड़ी? इसके पीछे कई बड़े कारण और उद्देश्य थे। आइए इन्हें एक-एक करके बहुत ही आसान तरीके से समझते हैं:
- बच्चों की भूख मिटाना: बहुत से गरीब बच्चे सुबह बिना कुछ खाए स्कूल आते थे। खाली पेट पढ़ाई समझ में नहीं आती। इसलिए सबसे पहला लक्ष्य था क्लास में बैठे बच्चों की भूख को मिटाना।
- स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाना (Enrollment): गरीब परिवारों के माता-पिता अपने बच्चों को काम पर भेज देते थे ताकि दो वक्त की रोटी मिल सके। सरकार ने सोचा कि अगर स्कूल में खाना मिलेगा, तो माता-पिता बच्चों को काम के बजाय स्कूल भेजेंगे।
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- स्कूल छोड़ने से रोकना (Reduce Dropout Rate): कई बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते थे। इस योजना से बच्चों का स्कूल में टिके रहना (Retention) बढ़ गया।
- पोषण में सुधार (Better Nutrition): बच्चों को सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि ऐसा खाना देना जिसमें विटामिन्स, प्रोटीन और मिनरल्स हों, ताकि वे कुपोषण (Malnutrition) का शिकार न हों।
- जाति-पाति का भेदभाव खत्म करना (Social Equality): जब सभी जातियों और धर्मों के बच्चे एक साथ एक ही पंगत में बैठकर खाना खाते हैं, तो उनके बीच दोस्ती बढ़ती है और भेदभाव खत्म होता है। यह समाज के लिए एक बहुत बड़ी जीत है।
मध्यान भोजन योजना (मिड डे मील) के नियम और पात्रता (Rules & Eligibility)

यह जानना भी बहुत जरूरी है कि इस योजना का लाभ किसे मिलता है और इसके नियम क्या हैं।
- कौन से बच्चे योग्य हैं? यह योजना कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए है।
- कौन से स्कूल शामिल हैं?
- सभी सरकारी स्कूल (Government Schools)
- सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल (Govt. Aided Schools)
- लोकल बॉडी (जैसे नगर निगम या पंचायत) द्वारा चलाए जाने वाले स्कूल
- मदरसे और मकतब जो सरकार से जुड़े हुए हैं (समग्र शिक्षा के तहत)
- छुट्टियों के दिन: गर्मियों की छुट्टियों में यह खाना नहीं मिलता है, लेकिन अगर किसी इलाके में सूखा (Drought) पड़ जाए, तो सरकार छुट्टियों में भी बच्चों को खाना उपलब्ध कराती है।
बच्चों को मिलने वाले भोजन का मेनू और पोषण (Menu and Nutritional Details)
सरकार ने यह तय किया है कि बच्चों को जो खाना मिले, उसमें पूरी ताकत (कैलोरी और प्रोटीन) होनी चाहिए। इसके लिए एक खास चार्ट बनाया गया है:
प्राइमरी क्लास (कक्षा 1 से 5 तक) के लिए:
- कैलोरी: 450 कैलोरी ऊर्जा
- प्रोटीन: 12 ग्राम प्रोटीन
- अनाज की मात्रा: 100 ग्राम (चावल या गेहूं)
- दाल: 20 ग्राम
- सब्जियां: 50 ग्राम
- तेल/घी: 5 ग्राम
अपर-प्राइमरी क्लास (कक्षा 6 से 8 तक) के लिए:
- कैलोरी: 700 कैलोरी ऊर्जा
- प्रोटीन: 20 ग्राम प्रोटीन
- अनाज की मात्रा: 150 ग्राम (चावल या गेहूं)
- दाल: 30 ग्राम
- सब्जियां: 75 ग्राम
- तेल/घी: 7.5 ग्राम
मेनू कैसा होता है? हर राज्य का मेनू वहां के स्थानीय स्वाद के हिसाब से अलग होता है। लेकिन आम तौर पर बच्चों को दाल-चावल, रोटी-सब्जी, खिचड़ी, दलिया, पुलाव और कभी-कभी मौसमी फल या दूध भी दिया जाता है। खाना पकाने में साफ़-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है।
मध्यान भोजन योजना के लाभ (Benefits of Mid Day Meal Scheme)
जब से यह योजना लागू हुई है, तब से हमारे देश के शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़े बदलाव आए हैं:
- गरीब परिवारों को राहत: जो माता-पिता अपने बच्चों को अच्छा खाना नहीं दे पाते थे, उनके लिए यह योजना एक वरदान बन गई।
- लड़कियों की शिक्षा में बढ़ावा: पहले लड़कियों को स्कूल कम भेजा जाता था। लेकिन मुफ्त खाने के लालच में ही सही, गाँव-देहात में लोगों ने अपनी बेटियों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया।
- रोजगार के अवसर: स्कूलों में खाना बनाने के लिए रसोइयों (Cooks) की जरूरत पड़ी। इससे लाखों गरीब और विधवा महिलाओं को अपने ही गाँव में काम और वेतन (Salary) मिल गया।
- बच्चों की सेहत में सुधार: लगातार पौष्टिक खाना मिलने से बच्चों का वजन और लम्बाई सही तरीके से बढ़ने लगी और बीमारियों से लड़ने की उनकी ताकत भी बढ़ी है।
2026 अपडेट: योजना की वर्तमान स्थिति (पीएम पोषण योजना)
समय के साथ हर योजना में सुधार होते हैं। madhyan bhojan yojana kya hai, इसे अब एक नए और आधुनिक रूप में देखा जा रहा है। हाल ही के वर्षों में, भारत सरकार ने ‘मध्यान भोजन योजना’ का नाम बदलकर ‘पीएम पोषण योजना’ (PM Poshan – Pradhan Mantri Poshan Shakti Nirman) कर दिया है।
इसमें क्या नया जोड़ा गया है?
- बालवाटिका (Pre-primary): अब सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से पहले (यानी प्री-प्राइमरी या बालवाटिका) पढ़ने वाले छोटे बच्चों को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है।
- तिथि भोजन का विचार: इसमें आम लोगों को भी जोड़ा गया है। अगर किसी व्यक्ति का जन्मदिन है या कोई खास मौका है, तो वह अपनी तरफ से स्कूल के बच्चों को स्पेशल खाना खिला सकता है।
- न्यूट्रिशन गार्डन (Nutrition Gardens): स्कूलों में ही खाली जगह पर फल और सब्जियां उगाने का काम शुरू किया गया है, ताकि बच्चों को एकदम ताजी और बिना केमिकल वाली सब्जियां मिल सकें।
- डिजिटल निगरानी: अब इंटरनेट और मोबाइल एप के जरिए यह नजर रखी जाती है कि खाना हर दिन बन रहा है या नहीं और उसकी क्वालिटी कैसी है।
योजना के सामने आने वाली चुनौतियां (Challenges and Problems)

कोई भी योजना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसमें कुछ न कुछ कमियां आ ही जाती हैं। मध्यान भोजन योजना के साथ भी कुछ ऐसी ही दिक्कतें कभी-कभी देखने को मिलती हैं:
- भ्रष्टाचार: कई बार ऐसा होता है कि बच्चों के लिए आया हुआ राशन कुछ बेईमान लोग बाजार में बेच देते हैं।
- साफ-सफाई की कमी: कुछ स्कूलों में रसोईघर साफ़ नहीं होते, जिसकी वजह से खाने में कीड़े या छिपकली गिरने जैसी बुरी खबरें न्यूज़ में आती हैं।
- फंड की देरी: कई बार स्कूलों को खाना बनाने का पैसा और राशन सरकार से बहुत देर से मिलता है, जिससे मास्टरों को अपनी जेब से पैसा लगाना पड़ता है।
- कम पोषण: मेनू में जो लिखा होता है, कई बार बच्चों को वह सब नहीं मिलता। सिर्फ पतला पानी जैसी दाल और चावल दे दिया जाता है।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार और हम सभी नागरिकों को मिलकर ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप किसी स्कूल में गड़बड़ी देखते हैं, तो उसकी शिकायत जरूर करनी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में, अगर हम एक लाइन में समझें कि madhyan bhojan yojana kya hai, तो यह भारत के भविष्य (हमारे बच्चों) को स्वस्थ और शिक्षित बनाने का एक बेहतरीन प्रयास है। खाली पेट न तो भजन होता है और न ही पढ़ाई। भारत सरकार की यह योजना लाखों बच्चों की जिंदगी में एक नई उम्मीद और मुस्कान लेकर आई है। हालाँकि, इसमें जो कमियां हैं, उन्हें कड़े नियमों से सुधारने की जरूरत है ताकि हर गरीब बच्चे को उसका हक मिल सके।
हमें उम्मीद है कि आपको आसान भाषा में लिखी गई यह जानकारी अच्छी लगी होगी। शिक्षा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी ऐसी ही सरल और सटीक जानकारी के लिए आप kyahaihindi.com के अन्य आर्टिकल्स भी जरूर पढ़ें!
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask – FAQs)
मिड डे मील का नया नाम क्या है?
मिड डे मील (मध्यान भोजन योजना) का नया नाम अब ‘पीएम पोषण योजना’ (PM POSHAN) कर दिया गया है।
मध्यान भोजन योजना की शुरुआत किस राज्य में हुई थी?
पूरे भारत में इस तरह की योजना सबसे पहले दक्षिण भारत के राज्य ‘तमिलनाडु’ में शुरू की गई थी। इसके बाद ही इसे पूरे देश में लागू किया गया।
यह योजना कौन सी कक्षा तक के बच्चों के लिए है?
यह योजना सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक (प्राइमरी और अपर-प्राइमरी) के बच्चों के लिए है। अब इसमें बालवाटिका के बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है।
मिड डे मील योजना में एक बच्चे को कितना खाना मिलता है?
प्राइमरी (कक्षा 1-5) के बच्चे को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि अपर-प्राइमरी (कक्षा 6-8) के बच्चे को 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन वाला खाना रोज़ाना दिया जाता है।
अगर स्कूल में खाना खराब मिले तो क्या करें?
अगर खाना खराब है या कम मिल रहा है, तो आप स्कूल के प्रिंसिपल, ग्राम प्रधान या अपने जिले के शिक्षा अधिकारी (BSA – Basic Shiksha Adhikari) से तुरंत शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकारों ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।